Biography of Virat Kohli in Hindi
वो खुद ही तय करते हैं मंजिल आसमानों की।
परिंदों को नहीं दी जाती तालीम उड़ानों की।
रखते हैं जो होंसला आसमां छूने का।
उनको नहीं प्रवाह कभी गिर जाने की।
जी हां। नमस्कार दोस्तों आज मैं आपको एक ऐसे टृयू क्रिकेट सेंसेशन की कहानी से अवगत कराने जा रहा हूं जिन्होंने क्रिकेट जगत के साथ साथ फिटनेस की परिभाषा को भी बदल कर रख दिया है। जी हां दोस्तों जनाब का नाम है विराट कोहली। तो चलिए शुरू करते हैं और कोशिश करते हैं कुछ सीखने की।
विराट कोहली का प्रदर्शन
| प्रारूप (format) | match | Inns | NO | Runs | HS | Ave | BF | SR | 100s | 50s | 4s | 6s | Ct | St |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| टेस्ट | 91 | 153 | 10 | 7490 | 254* | 52.37 | 13112 | 57.12 | 27 | 25 | 839 | 22 | 88 | 0 |
| वनडे | 254 | 245 | 39 | 12169 | 183 | 59.07 | 13061 | 93.17 | 43 | 62 | 1140 | 125 | 132 | 0 |
| t20 | 90 | 84 | 24 | 3159 | 94* | 52.65 | 2272 | 139.04 | 0 | 28 | 285 | 90 | 42 | 0 |
| फर्स्ट क्लास | 123 | 201 | 17 | 9739 | 254* | 52.92 | 17015 | 57.23 | 34 | 33 | 1152 | 37 | 119 | 0 |
| लिस्ट ए | 288 | 278 | 42 | 13611 | 183 | 57.67 | 14597 | 93.24 | 47 | 70 | 1304 | 149 | 150 | 0 |
| T20 | 311 | 296 | 58 | 9929 | 113 | 41.71 | 7412 | 133.95 | 5 | 72 | 879 | 315 | 135 | 0 |
बचपन
दोस्तों विराट कोहली का जन्म 5 नवंबर 1988 को दिल्ली में एक पंजाबी हिंदु परिवार में हुआ। उनके पिता का नाम प्रेम कोहली था जो पेशे से एक वकील थे। और उनकी माता का नाम सरोज कोहली है। दोस्तों विराट अपने बहन भाइयों में सबसे छोटे हैं।वे जब तीन साल के थे तभी वे बैट लेकर अपने पिता से बालिंग करने को कहते।
करियर की शुरुआत
विराट कोहली ने अपनी पढ़ाई विशाल भारती पब्लिक स्कूल से की है। दोस्तों विराट भी कभी गली क्रिकेटर हुआ करते थे मगर वे इतने टेलेंटेड थे कि उनके पड़ोसियों ने उनके पिता को सलाह दी की वे उन्हें प्रोफैशनल क्लब में ट्रेनिंग दिलवाएं। विराट ने 1988 मे दिल्ली क्रिकेट अकैडमी में पहले बैच में हिस्सा लिया विराट के कोच बताते हैं कि विराट उन बच्चों में से थे जो कभी नहीं थकते थे आप उनसे कभी भी बैटिंग करने को कहो वे हमेशा तैयार रहते थे। विराट के पिता हमेशा से बेटे को एक बड़ा क्रिकेटर बनते देखना चाहते थे।17 दिसंबर 2006 को विराट अपना पहला रणजी सीजन खेल रहे थे। उस दिन विराट के पिता की तबीयत ठोड़ी खराब थी अगले दिन विराट को पता चला कि सैरैबरेल(cerebral) अटैक के चलते उनके पिता की मृत्यु हो गई है। विराट उस वक्त बहुत रोए उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे क्या करें तभी उन्हें अपने पिता का सपना याद आया। वे चाहते थे कि उनका बेटा देश के लिए खेलें इसलिए वे मैदान पर वापस आए क्योंकि उनकी टीम को उनकी जरूरत थी और उन्होंने अपनी टीम के लिए 90 रन बनाए और उसके बाद घर पहुंच कर अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। उस दिन के बाद विराट काफी बदल गए अब वे अपने पिता के सपने को जीना चाहते थे।
विराट ने बचपन में बहुत सी मुश्किलें देखी। छोटी उम्र में पिता को खोना यह वह दौर था जिसे विराट कभी नहीं भूल सकते। विराट ने पहली बार दिल्ली के लिए अक्टूबर 2002 में खेला जहां वे लीडिंग रन गैटर थे।
विराट कोहली का शुरूआती दौर।
2008 में मलेशिया में अंडर 19 वर्ल्ड कप में विराट अपनी टीम के कप्तान थे उनकी कप्तानी में उनकी टीम ने जीत हासिल की।
अपने शुरुआती दौर में इंडियन टीम में रिवर्स बैट्समैन के तौर पर खेलने वाले विराट उस टीम का हिस्सा बने जिसने 2011 में वर्ल्ड कप जीता।
2011-12 के आस्ट्रेलिया टूर पर जब सचिन तेंदुलकर, द्रविड़ और लक्ष्मण जैसे बड़े बल्लेबाज रन नहीं बना पा रहे थे वहां विराट अकेले ऐसे थे जिन्होंने ऐसे मुश्किल समय में सेंचुरी लगाई ।यह उनके टेस्ट करियर की पहली सेंचुरी थी। 2013 में विराट ने 52 बाल में शतक लगा कर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फास्टेस्ट सेंचुरी का रिकॉर्ड बनाया।
सपना हुआ साकार।
दोस्तों विराट कोहली हमेशा से ही इंडिया टीम के लिए खेलना चाहते थे और वे दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेटर बनना चाहते थे आज virat अपने सपने को हकीकत में जी रहे हैं।वे आईपीएल में आरसीबी की तरफ़ से खेलते हैं।
कहानी से सीख।
दोस्तों विराट की कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि अगर आप अपने सपने के पिछे पागल है और लगातार उस पर मेहनत कर रहे है तो आपका सपना एक दिन जरूर पूरा होगा।
उम्मीद करता हूं आपने विराट की कहानी से जरूर कुछ सीखा होगा।

Great
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